--:--

नेपाल टनल हादसा: 900 से ज्यादा मजदूर लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

नेपाल में ग्लेशियर फटने से आई तबाही के बाद 900 से ज्यादा मजदूर टनल में फंसे हैं। भारत और चीन की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

JustFinds Desk2 hr ago 5 min read Human-edited desk copy

Audio news · short story

~4 min · real voice narration

नेपाल टनल हादसा: 900 से ज्यादा मजदूर लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी — JustFinds Trending cover
Original JustFinds artwork — no stock or copyrighted imagery.

Headline: नेपाल टनल हादसा: 900 से ज्यादा मजदूर लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

JustFinds Desk

नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में 933 हाइड्रोपावर मजदूर सुरंगों के भीतर फंसे हुए हैं। 26 अगस्त 2026 की सुबह लैंगटांग लिरुंग ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने से आई भीषण बाढ़ ने इन सुरंगों के प्रवेश द्वारों को भारी मलबे और विशाल चट्टानों से पूरी तरह पाट दिया है। जमीन से सैकड़ों फीट नीचे काम कर रहे इन कर्मचारियों के पास बाहर निकलने का फिलहाल कोई रास्ता नहीं बचा है। [[1]](https://www.aljazeera.com/news/2026/8/31/nepal-tunnel-traps-hinder-flood-rescue-how-many-are-dead-or-missing) मलबे के गिरने से नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे 12 चालू बिजली घर ठप हो गए। रसुवा के पास 15 निर्माणाधीन साइट्स मलबे में इस तरह दब गई हैं कि वहां तक पहुंचना बचाव दलों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।

ग्लेशियर फटने से भीषण तबाही

नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुताबिक, यह तबाही 5,200 मीटर की ऊंचाई पर लैंगटांग लिरुंग चोटी का एक हिस्सा टूटने से शुरू हुई। चट्टानों और बर्फ का यह विशाल हिस्सा करीब 1,200 मीटर नीचे लेंडे नदी में गिरा, जिससे पानी का बहाव एक जानलेवा फ्लैश फ्लड में बदल गया और रास्ते में आने वाले कई पुलों और सड़कों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। [[2]](https://www.facebook.com/cnn/posts/a-search-is-underway-for-almost-900-missing-employees-at-various-hydropower-proj/1455507976441849/) चीन-नेपाल सीमा पर मलबे के जमा होने से एक विशाल कृत्रिम झील बन गई है। विशेषज्ञ डरे हुए हैं। यदि यह अस्थाई झील अचानक फूटती है, तो निचले इलाकों में दोबारा बाढ़ आ सकती है। प्रशासन अब सैटेलाइट डेटा के जरिए लापता मजदूरों की सही लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश में जुटा है।

लापता और रेस्क्यू आंकड़े

हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं। बीबीसी ने 389 मौतों की पुष्टि की है, जबकि अल जजीरा और चैनल 4 के अनुसार यह आंकड़ा 900 के पार जा चुका है। पूरे नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में लापता लोगों की कुल संख्या 4,200 से 5,000 के बीच होने का अनुमान लगाया जा रहा है। [[3]](https://www.nytimes.com/2026/08/29/world/asia/nepal-flood-hydropower-tunnels-rescue-missing-workers.html)

विवरणसंख्या (अनुमानित/पुष्टि)
टनल में लापता मजदूर933
कुल पुष्ट मौतें900+
कुल लापता (क्षेत्रीय)4,200 से 5,000
बचाए गए मजदूर279 से 361
तैनात नेपाली सुरक्षाकर्मी21,000
चीनी बचाव दल2,100
भारतीय सेना के विशेषज्ञ18
चीन की राहत राशि$33 मिलियन

सुरंगों में जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन

अंधेरी सुरंगों में फंसे मजदूरों तक पहुंचना तकनीकी रूप से बहुत पेचीदा काम है। रेस्क्यू टीमें टनल के ऊपरी हिस्से यानी 'क्राउन एरिया' को काटकर नया रास्ता बनाने की कोशिश कर रही हैं। मलबे के दोबारा खिसकने के डर से खुदाई का काम बहुत धीमी गति से किया जा रहा है ताकि बचाव दल सुरक्षित रहे और कोई नया हादसा न हो।

बचाव के तरीके 1. खुदाई और ड्रिलिंग: भारी मशीनों से टनों मलबा हटाकर संकरी जगहों पर छोटे छेद किए जा रहे हैं। 2. ऑक्सीजन सप्लाई: पंपों के जरिए सुरंगों के अंदर ताजी हवा भेजी जा रही है ताकि वहां फंसे लोग सांस ले सकें। 3. सेंसिंग तकनीक: चीनी दल मलबे के नीचे दबी आवाजों और शरीर की गर्मी पहचानने के लिए थर्मल कैमरों का उपयोग कर रहे हैं। 4. त्रिशूली 3A साइट: इस प्रोजेक्ट के केबल टनल पर सबसे ज्यादा ध्यान है क्योंकि यहां सबसे अधिक लोगों के फंसे होने की आशंका है।

अंतरराष्ट्रीय मदद और विशेषज्ञ

नेपाल सरकार ने आपदा की गंभीरता को देखते हुए भारत, चीन और अमेरिका से तकनीकी सहायता मांगी है। भारतीय सेना के 18 विशेषज्ञ अधिकारी, जिन्हें टनल रेस्क्यू का पुराना अनुभव है, मौके पर तैनात किए गए हैं। भारत ने दुर्गम रास्तों पर भारी मशीनें ले जाने के लिए प्रीफैब्रिकेटेड 'बेली ब्रिज' भी भेजे हैं। चीन ने इस ऑपरेशन के लिए 2,100 बचावकर्मियों को भेजा है और 220 मिलियन युआन की आर्थिक मदद दी है। दुर्गम इलाकों में फंसे दलों के लिए चीनी विमानों से जरूरी उपकरण और रसद गिराई जा रही है। बचाव दल अब पूरी तरह से मलबे के नीचे दबे हिस्सों तक पहुंचने पर केंद्रित हैं। [[4]](https://edition.cnn.com/2026/08/30/world/video/more-than-900-missing-from-nepali-tunnel-projects-like-this-digvid-vrtc-hnk)

शिनाख्त और फोरेंसिक जांच

मलबे से निकाले जा रहे शवों की पहचान करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। भारी दबाव और कीचड़ के कारण शवों की स्थिति काफी खराब हो चुकी है, जिससे सामान्य तरीके से शिनाख्त संभव नहीं है। जिला प्रशासन अब केवल डीएनए परीक्षण के आधार पर ही शवों को परिजनों को सौंप रहा है। सैकड़ों परिवार अपनों की तलाश में टनल साइट्स और अस्पतालों के बाहर डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। बिना वैज्ञानिक पुष्टि के प्रशासन किसी भी शव को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों के हवाले नहीं कर रहा है।

राहत कार्य में रुकावटें

बचाव दल को भौगोलिक और तकनीकी स्तर पर कई बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य घटना के बाद भी इलाके में छोटे भूस्खलन जारी हैं, जो बचावकर्मियों के लिए लगातार खतरा पैदा कर रहे हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में खराब मौसम और धुंध की वजह से हेलीकॉप्टर ऑपरेशन बार-बार रोकने पड़ रहे हैं। रसुवा और धाडिंग के दूरदराज इलाकों में मोबाइल टावर गिरने से संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई थी। अब इसे धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है ताकि बचाव कार्यों में बेहतर समन्वय बनाया जा सके।

सुरक्षा ऑडिट और चुनौतियां

हिमालयी क्षेत्र में बड़े निर्माण कार्यों और कच्चे पहाड़ों ने इस तबाही के असर को कई गुना बढ़ा दिया है। 26 अगस्त की यह घटना नेपाल की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में गिनी जा रही है। अब टनल प्रोजेक्ट्स के लिए सख्त सुरक्षा ऑडिट और अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाना अनिवार्य हो गया है। प्रशासन उन परिवारों को जवाब देने की कोशिश में जुटा है जिनके सदस्य लापता हैं। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, सुरंगों के अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की उम्मीदें और चुनौतियां दोनों ही बदल रही हैं। [[5]](https://www.facebook.com/Channel4News/videos/rescuers-in-nepal-are-racing-to-reach-around-900-people-believed-to-be-trapped-i/2027668751956119/)

References

  1. 1Nepal tunnel traps hinder flood rescue: How many are ...
  2. 2CNN
  3. 3Days After Nepal Flood, Rescuers Bore Through Tunnels ...
  4. 4More than 900 missing from Nepali tunnel projects like this - CNN
  5. 5Rescuers in Nepal are racing to reach around 900 people believed to be ...
  6. 6Nepal Flood Horror: India Rushes In Tunnel Rescue Experts As 900 ...
#nepal tunnel disaster#missing workers#langtang lirung#flash flood nepal#nepal disaster 2026

Frequently asked questions

नेपाल टनल हादसा कब शुरू हुआ?

यह आपदा 26 अगस्त 2026 को शुरू हुई, जब लैंगटांग लिरुंग चोटी के पास ग्लेशियर टूटकर लेंडे नदी में गिर गया।

सुरंगों में कुल कितने मजदूर लापता हैं?

विभिन्न हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में लगभग 933 मजदूर लापता हैं। पूरे क्षेत्र में यह संख्या 5,000 तक हो सकती है।

हादसे का मुख्य कारण क्या था?

5,200 मीटर की ऊंचाई पर लैंगटांग लिरुंग ग्लेशियर का फटना और मलबे का नदी में गिरना मुख्य कारण था।

भारत इस आपदा में क्या मदद कर रहा है?

भारत ने 18 सैन्य विशेषज्ञों की टीम और संपर्क बहाली के लिए बेली ब्रिज भेजे हैं।

चीन की रेस्क्यू टीम कौन सी तकनीक इस्तेमाल कर रही है?

चीनी दल थर्मल कैमरे और साउंड डिटेक्टर का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने 220 मिलियन युआन की मदद भी दी है।

अब तक कितने मजदूरों को सुरक्षित निकाला गया है?

आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, अब तक 279 से 361 मजदूरों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

कौन से जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं?

नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिले इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

त्रिशूली 3A प्रोजेक्ट पर रेस्क्यू की क्या स्थिति है?

यह बचाव कार्य का मुख्य केंद्र है, जहाँ केबल टनल को काटकर अंदर फंसे लोगों तक पहुँचने की कोशिश जारी है।

बॉर्डर पर नई झील बनने से क्या खतरा है?

मलबे से बनी कृत्रिम झील फटने पर निचले इलाकों में दोबारा भयंकर बाढ़ आने का खतरा है।

शवों की पहचान के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जा रही है?

शवों की पहचान के लिए फॉरेंसिक टीमें डीएनए (DNA) टेस्ट का सहारा ले रही हैं।

Sources referenced

More in Trending